सुन ले मुसाफ़िर, मेरे मुँह से
प्यार की दो‑चार मीठी बातें।
प्यार की झलकती हुई दुनिया में
खो जा रहा हूँ मैं, क्या करूँ मैं।सुन ले राहगीर, मेरे दिल का
दर्द की दो‑चार मीठी दास्तान।
कविता की राहों में भटकती हुई मैं
उड़ जा रहा हूँ मैं, क्या करूँ मैं।सुन ले मुसाफ़िर, मेरे दिल का
प्यार की दो‑चार मीठी दास्तान।
- I wrote this hindi poem long back, and tried to give tune! I don't have any idea about music, but tried a difficult task of fixing tune of this small poem! Don't know if it was worthy or not.
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ऐ हवा, तू आ जा ना मेरे पास
ऐ बादल, तू छूने देना मुझे आकाश
ऐ हवा, तू आ जा ना मेरे पास
ऐ बादल, तू छूने देना मुझे आकाश
तेरे लिए मैं तड़पता रहा हूँ
तेरे कदमों को फूलों से सजाया हूँ
तेरे लिए मैं पागल हुआ हूँ…
ऐ हवा, तू आ जा ना मेरे पास
ऐ बादल, तू छूने देना मुझे आकाश
Old lines, rewritten in my blog! Neath, Summer 2026